ਬੁਲ੍ਹਿਆ ਮੇਰੀ ਬੁੱਕਲ਼ ਵਿਚੋਂ

ਸਾਬਰ ਅਲੀ ਸਾਬਰ

बलह्াया मेरी बुक्कल वचों किस तरहां निकले चोर
ऑल दिवाले मुलां क़ाज़ी में व-ए-चिकार खिलोता
ज़ुर्म धरम दा क़ैदी बन के पब्बां भार खिलोता
सच्च दा वेरी ढ्ड दा कुत्ता पहरेदार खिलोता
गिल पिया ढोल जय लाहना चाहवां पै जांदा ए शोर
बलिया मेरी बकुल वचों किस तरहां निकले चोर

Read this poem in Roman or شاہ مُکھی

ਸਾਬਰ ਅਲੀ ਸਾਬਰ ਦੀ ਹੋਰ ਕਵਿਤਾ